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नज़्म
मजीद अमजद
नज़्म
धड़-धड़ धड़-धड़ धड़क रही है हर हर छाती मिट्टी की
सरसर सरसर सरक रहे हैं सारे शाने मिट्टी के
ख़लील-उर-रहमान आज़मी
नज़्म
उठा रहा है सू-ए-आसमाँ वो तन्हा शाख़
सरक रही है अभी जिस में ज़िंदगी की नमी