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नज़्म
बिर्ज लाल रअना
नज़्म
कहीं नहीं है कहीं भी नहीं लहू का सुराग़
न सर्फ़-ए-ख़िदमत-ए-शाहाँ कि ख़ूँ-बहा देते
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
मज़ाक़-ए-आम सर्फ़-ए-कम-निगाही है तो रहने दो
दिल-ए-शाइ'र की आँखों में अभी तनवीर बाक़ी है
राम प्रकाश राही
नज़्म
क़य्यूम नज़र
नज़्म
हो अगर हाथों में तेरे ख़ामा-ए-मोजिज़ रक़म
शीशा-ए-दिल हो अगर तेरा मिसाल-ए-जाम-ए-जम
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
ये कार-ज़ार-ए-हस्ती है रंज-ओ-ग़म की बस्ती
फिर याद-ए-बज़्म-ए-जम में इक जाम-ए-जम पिला दे
ख़ुशी मोहम्मद नाज़िर
नज़्म
जब कोई क़र्ज़ सदाक़त का चुकाने के लिए
ज़हर का दुर्द-ए-तह-ए-जाम भी पी लेता है
सुलैमान अरीब हैदराबादी
नज़्म
तुम्हें रुस्वा सर-ए-बाज़ार-ए-आलम हम भी देखेंगे
ज़रा दम लो मआल-ए-शौकत-ए-जम हम भी देखेंगे