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नज़्म
रूह-ए-मुश्त-ए-ख़ाक में ज़हमत-कश-ए-बेदाद है
कूचा गर्द-ए-नय हुआ जिस दम नफ़स फ़रियाद है
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
कुछ तो नज़्म-ओ-नक़्श-ए-मुल्क में भी दीजिए दख़्ल
शेवा-ए-हक़-तलबी है ये कोई जंग नहीं
शिबली नोमानी
नज़्म
सरापा नाला-ए-बेदाद-ए-सोज़-ए-ज़िंदगी हो जा
सपंद-आसा गिरह में बाँध रक्खी है सदा तू ने
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
वो जलाल-ए-शेवा-ए-सादगी वो जमाल-ए-सूरत-ए-ज़िंदगी
वो ज़ुलाल-ए-चश्मा-ए-आगही कि ज़माना-भर को जगा दिया
इक़बाल सुहैल
नज़्म
ज़मीन पे क़ाबील के क़बीले की रस्म-ए-बे-दाद औज पर है
मगर हमारा अज़ाब इस से भी तल्ख़-तर है
ज़िया जालंधरी
नज़्म
मर्हबा ऐ नौ-गिरफ़्तारान-ए-बेदाद-ए-फ़रंग
जिन की ज़ंजीरें ख़रोश-अफ़ज़ा-ए-ज़िंदाँ हो गईं
ज़फ़र अली ख़ाँ
नज़्म
वो शहीद-ए-शेवा-ए-दिलबरी वो क़तील-ए-नावक-ए-दोस्ती
वो ख़तीब-ए-मिम्बर-ए-आश्ती उसे अपनी क़ौम ने क्या दिया
फैज़ तबस्सुम तोंसवी
नज़्म
ख़्वाब वो ख़्वाब कि हो जिस तमाज़त का फ़ुसूँ-ज़ाद
ख़्वाब वो ख़्वाब कि बन जाए शिकस्त-ए-बे-दाद