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नज़्म
ज़फ़र सय्यद
नज़्म
मैं जो चाहूँ ग़म-ए-हस्ती का इज़ाला कर दूँ
ज़ुल्मत-ए-बख़्त को इक पल में उजाला कर दूँ
ख्वाजा मंज़र हसन मंज़र
नज़्म
और इस मंज़र के पीछे रैली-बाज़ों का हुजूम
तुझ को ले आया कहाँ ऐ शहर तेरा बख़्त-ए-शूम
रज़ा नक़वी वाही
नज़्म
अली अकबर नातिक़
नज़्म
काश तू मेरे लिए वजह-ए-कशूद-ए-कार हो
तेरी क़ुम से बख़्त-ए-ख़्वाबीदा मिरा बेदार हो