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नज़्म
सब ठाठ पड़ा रह जावेगा जब लाद चलेगा बंजारा
कुछ काम न आवेगा तेरे ये लाल-ओ-जमुर्रद सीम-ओ-ज़र
नज़ीर अकबराबादी
नज़्म
कभी तुम ख़ला से गुज़रो किसी सीम-तन की ख़ातिर
कभी तुम को दिल में रख कर कोई गुल-अज़ार आए
साहिर लुधियानवी
नज़्म
पारा पारा अब्र सुर्ख़ी सुर्ख़ियों में कुछ धुआँ
भूली-भटकी सी ज़मीं खोया हुआ सा आसमाँ
जोश मलीहाबादी
नज़्म
परवीन शाकिर
नज़्म
अभी दिमाग़ पे क़हबा-ए-सीम-ओ-ज़र है सवार
अभी रुकी ही नहीं तेशा-ज़न के ख़ून की धार
मख़दूम मुहिउद्दीन
नज़्म
सीम-ओ-ज़र का देवता जिस जा कभी सोता नहीं
ज़िंदगी का भूल कर जिस जा गुज़र होता नहीं
मख़दूम मुहिउद्दीन
नज़्म
एक ने दुनिया के पौदे बाग़ में अपने लगाए
एक ने छोड़े दफ़ीने सीम-ओ-ज़र के बे-शुमार