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नज़्म
साहिर लुधियानवी
नज़्म
मुँह में कुछ खोखले बे-मअ'नी से जुमले रख लो
मुख़्तलिफ़ हाथों में सिक्कों की तरह घिसते रहो
निदा फ़ाज़ली
नज़्म
शहर में ऐसे मुसव्विर हैं जो सिक्कों के एवज़
हुस्न में लैला-ओ-अज़रा से बढ़ा देंगे तुझे
हबीब जालिब
नज़्म
हिंदुओं से तुझे लेना है ज़ेहानत का कमाल
और सिक्खों से शुजाअ'त कि न हो जिस की मिसाल
कुँवर महेंद्र सिंह बेदी सहर
नज़्म
दफ़्तरों में महकमों में बढ़ गया उज़्व-ए-वक़ार
जम गया चलते हुए सिक्कों पे नक़्श-ए-ए'तिबार
सफ़ी लखनवी
नज़्म
चंद सिक्कों पे हुआ करता है हर शब को निसार
मेरे सीने का गुदाज़ और जवानी की बहार