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नज़्म
साँवले चेहरे पे वो कानों के बाले की दमक
नाज़-ए-बे-जा भी न था रुख़ पे तफ़ाख़ुर की झलक
असलम अंसारी
नज़्म
मोईन निज़ामी
नज़्म
उन की उस नुसरत-ए-बे-जा पे मुझे रश्क नहीं
आज भी मुझ में है वो जोश-ए-जुनूँ अज़्म-ओ-यक़ीं
ज़हीर सिद्दीक़ी
नज़्म
कि अपनी अज़्मत-ए-ख़ुफ़्ता को नेज़ों से जगा दूँगा
मज़ा बे-जा जसारत का हरीफ़ों को चखा दूँगा
वफ़ा बराही
नज़्म
ऐ वक़्त-ए-बे-मुरव्वत ऐ वक़्त-ए-बे-मुरव्वत
थे ख़ार-ज़ार जिस जा है बुलबुलों का मस्कन
अज़ीमुद्दीन अहमद
नज़्म
ऐ वक़्त-ए-बे-मुरव्वत ऐ वक़्त-ए-बे-मुरव्वत
थे ख़ार-ज़ार जिस जा है बुलबुलों का मस्कन
अज़ीमुद्दीन अहमद
नज़्म
ख़याल मेरे औज पर न पर लगा के जा सका
मैं हिस्न-ए-बे-शिकस्त हूँ मैं राह-ए-बे-गुज़ार हूँ
सय्यद वहीदुद्दीन सलीम
नज़्म
मरने वाले की किसी हसरत में थीं आँखें खुली
उठ रहा था पैकर-ए-बे-जाँ से रह रह कर धुआँ