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नज़्म
तारिक़ क़मर
नज़्म
जूँ-ही किसी ने दी सदा दौड़ के सू-ए-दर गया
धक से हुआ है दिल मिरा जब भी कोई ठहर गया
फ़ज़ल हक़ अज़ीमाबादी
नज़्म
मतला-ए-अव्वल फ़लक जिस का हो वो दीवाँ है तू
सू-ए-ख़ल्वत-गाह-ए-दिल दामन-कश-ए-इंसाँ है तू
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
ये जवानी, ये परेशानी, ये पैहम इज़्तिराब
बार-हा उलझन में दौड़ा हूँ सू-ए-जाम-ए-शराब
मुईन अहसन जज़्बी
नज़्म
ब-सू-ए-नौहा-आबाद-ए-जहाँ आहिस्ता आहिस्ता
निकल कर आ रही है इक गुलिस्तान-ए-तरन्नुम से
नून मीम राशिद
नज़्म
जीत का पड़ता है जिस का दानों वो कहता है यूँ
सू-ए-दस्त-ए-रास्त है मेरे कोई फ़र्ख़न्दा-पय