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नज़्म
नाफ़ा-ए-मुश्क-ए-ततारी बन कर लिए फिरी मुझ को हर-सू
यही हयात-ए-साइक़ा-फ़ितरत बनी तअत्तुल कभी नुमू
अख़्तरुल ईमान
नज़्म
कैफ़िय्तय-ए-क़ब्ज़ उस की तबीअ'त में रहेगी
ज़ेहन उस का मज़ाफ़ात-ए-तअत्तुल में मिलेगा
रज़ा नक़वी वाही
नज़्म
हर इक हैवान-ए-सरकारी को टट्टू जानता हूँ मैं
सो ज़ाहिर है इसे शय से ज़ियादा मानता हूँ मैं
जौन एलिया
नज़्म
कितनों की गाड़ी रथ हैं कितनों के घोड़े टट्टू
जिस पास कुछ नहीं है वो हम सा है निखट्टू
नज़ीर अकबराबादी
नज़्म
उल्लू को हर शाख़ पे बैठा देख के टट्टू ख़्वार हुआ
मेंडक की टर-टर से दरियाई घोड़ा बेज़ार हुआ
जमील उस्मान
नज़्म
चौराहों पर खड़े हुए बकरों के हैं जो ग़ोल
तू उन के मुँह को खोल के दाँतों को मत टटोल