aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "ta.dkhan"
कोई शीशा चटख़्ता हैकिसी बिल्लोर की तड़ख़न मिरे कानों तक आती है
सूत की दुकानें हैंकुछ तआम-ख़ाने हैं''
ज़ियादा पास मत आनामैं वो तह-ख़ाना हूँ जिस में
दोपहर हो कि नूर का तड़काफ़स्ल-ए-गुल हो कि दौर पतझड़ का
जहाँ-तहाँ, हाज़िर और नाज़िरऐ सब दानाओं से दाना
जब हुई घर से बहुत दूर बिलाली मस्जिदहम ने ''तह-ख़ाने'' में छोटी सी बना ली मस्जिद
एक ठहराव इक तकान है तूदेख किस दर्जा धान-पान है तू
ये जहाँ तंग है तारीक है तह-ख़ाना हैक़िस्सा-ए-रंज-ओ-अलम दर्द का अफ़्साना है
आवाज़ें रात की ख़ामोशी में ओझल होने का संदेसा लाई हैंचाँद के आधे टुकड़े पर कुछ ख़्वाबों की तदफ़ीन हुई है
कोई कोना-खदरा तह-ख़ानाअब हर जंगल में मंगल होगा
ये सेहहत-बख़्श तड़का ये सहर की जल्वा-सामानीउफ़ुक़ सारा बना जाता है दामान-ए-चमन जैसे
कि पीपल-मंडी-ओ-पन्नी गली के भी आएजहाँ-तहाँ से ये घिर घिर के लोग सब धाए
तदफ़ीनचार तरफ़ सन्नाटे की दीवारें हैं
कहीं आओ छुप जाएँ जाकर तमाम आफ़तों सेमुझे एक तह-ख़ाना मालूम है ख़ुशनुमा सा
सैंकड़ों मन यूँ तो गेहूँ मेरे तह-ख़ाने में हैऔर मज़ा भी क्या मुझे आज़ार पहचाने में है
जो समझ सके मिरे रत-जगों की ज़बान कोमिरी लग़्ज़िशों की तकान को
गुल-ओ-लाला हैं मुस्तइद बे-तकाँरफ़ीक़ों ने रक्खी हथेली पे जाँ
वक़्त,जहाँ तहाँ से फट गया है
अजूबे के हमराहबग़ली तह-ख़ाने में
करें ताकि तदफ़ीन के.म.सी वालेजभी बीच रस्ते में मरती है बिल्ली
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