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नज़्म
दिल ओ जाँ और आसाइश ये इक कौनी तमस्ख़ुर है
हुमुक़ की अबक़रिय्यत है सफ़ाहत का तफ़क्कुर है
जौन एलिया
नज़्म
दाम-ए-सिमीन-ए-तख़य्युल है मिरा आफ़ाक़-गीर
कर लिया है जिस से तेरी याद को मैं ने असीर
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
फ़िक्र-ए-इंसाँ पर तिरी हस्ती से ये रौशन हुआ
है पर-ए-मुर्ग़-ए-तख़य्युल की रसाई ता-कुजा
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
वो ख़मोशी शाम की जिस पर तकल्लुम हो फ़िदा
वो दरख़्तों पर तफ़क्कुर का समाँ छाया हुआ
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
ज़ख़्म-ख़ुर्दा हैं तख़य्युल की उड़ानें तेरी
तेरे गीतों में तिरी रूह के ग़म पलते हैं
साहिर लुधियानवी
नज़्म
मेरे तख़य्युल में जो इक तस्वीर बन के रह गई
जो दिल में मेरे बस के तक़दीर में किसी और की हो गई
आमिर रियाज़
नज़्म
जगमगा उठती है दुनिया-ए-तख़य्युल जिस से
दिल में वो शोला-ए-जाँ-सोज़ दबा रक्खा है