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नज़्म
शो'ला-ज़न उन के लहू में है जलाल-ए-महमूद
आज तक जो तह-ए-मेहराब रहे वक़्फ़-ए-सुजूद
अफ़सर सीमाबी अहमद नगरी
नज़्म
क़ौम के दर्द से हूँ सोज़-ए-वफ़ा की तस्वीर
मेरी रग रग से है पैदा तप-ए-ग़म की तासीर
चकबस्त बृज नारायण
नज़्म
ज़ेहन से जोश-ए-सुख़न का रंग कम होने लगा
तब’-ए-मौज़ूँ का सर-ए-तस्लीम ख़म होने लगा
बर्क़ आशियान्वी
नज़्म
न आँख उठाने की मोहलत न लब-कुशाई की ताब
निगाह-ओ-दिल की असीरी ख़मोशियों का अज़ाब