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नज़्म
फ़रोग़-ए-चश्म है तस्कीन-ए-दिल है बे-गुमाँ उर्दू
हर इक आलम में है गोया बहार-ए-गुल-फ़िशाँ उर्दू
अलम मुज़फ़्फ़र नगरी
नज़्म
ऐ दिल-ए-अफ़सुर्दा पीने की बहारें आ गईं
काली काली बदलियाँ फिर आसमाँ पर छा गईं
सय्यद आबिद अली आबिद
नज़्म
ऐ दिल-ए-बेताब तुझ में है सिफ़त सीमाब की
तेरे क़तरों में हैं कुछ बूँदें शराब-ए-नाब की
साक़िब कानपुरी
नज़्म
ऐ दिल-ए-बेताब तुझ में है सिफ़त सीमाब की
तेरे क़तरों में हैं कुछ बूँदें शराब-ए-नाब की
साक़िब कानपुरी
नज़्म
ऐ दिल-ए-अफ़सुर्दा वो असरार-ए-बातिन क्या हुए
सोज़ की रातें कहाँ हैं साज़ के दिन क्या हुए
जोश मलीहाबादी
नज़्म
ऐ दिल-ए-ग़म-गीं न कह ये ज़िंदगी इक ख़्वाब है
ज़िंदगी है इक हक़ीक़त गौहर-ए-नायाब है
साबिर अबुहरी
नज़्म
आह में ऐ दिल-ए-मज़लूम असर पैदा कर
जिस में सौदा-ए-मोहब्बत हो वो सर पैदा कर
लाला अनूप चंद आफ़्ताब पानीपति
नज़्म
चमकते हुए सब बुतों को मिटा दो
कि अब लौह-ए-दिल से हर इक नक़्श हर्फ़-ए-ग़लत की तरह मिट चुका है
फ़ख़्र-ए-आलम नोमानी
नज़्म
ख़ून-ए-दिल देना पड़ा ख़ून-ए-जिगर देना पड़ा
अपने ख़्वाबों की हसीं परछाइयाँ देना पड़ीं