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नज़्म
सोफ़ों पे अगर नाचें डैडी हमें मत रोको
कुछ अपनी भी इज़्ज़त है हर बात पे मत टोको
राजा मेहदी अली ख़ाँ
नज़्म
ज़ालिम को जो न रोके वो शामिल है ज़ुल्म में
क़ातिल को जो न टोके वो क़ातिल के साथ है
साहिर लुधियानवी
नज़्म
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
माँ बाप और उस्ताद सब हैं ख़ुदा की रहमत
है रोक-टोक उन की हक़ में तुम्हारे नेमत
अल्ताफ़ हुसैन हाली
नज़्म
गर्दन-ए-हक़ पर ख़राश-ए-तेग़-ए-बातिल ता-ब-कै?
अहल-ए-दिल के वास्ते तौक़-ओ-सलासिल ता-ब-कै?
जोश मलीहाबादी
नज़्म
ख़ुदा रक्खे कि मुझ पर मेहरबाँ हैं किस क़दर अम्मी
बुरी देखी जो कोई बात मुझ में प्यार से टोका
अबुल मुजाहिद ज़ाहिद
नज़्म
तुम यूँही ज़िद में हुए ख़ाक-ए-दर-ए-मय-ख़ाना
मुझ को ये ज़ोम कि मैं ने तुम्हें टोका कब था
शाज़ तमकनत
नज़्म
मुल्क में फ़िरक़ा-परस्तों की हुआ चल ही गई
न किसी ने सरज़निश की न उन्हें टोका गया