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नज़्म
कल जहाँ की चल रही है इल्म ही के ज़ोर से
ज़मीन ज़र उगल रही है इल्म ही के ज़ोर से
मोहम्मद शफ़ीउद्दीन नय्यर
नज़्म
बिलाल अहमद
नज़्म
नई कहानी जिस में धरती उगल रही हो सोना
अम्न-ओ-मोहब्बत के गीतों से गूँज रहा हो हर कोना