आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "uqda-e-jaa.n"
नज़्म के संबंधित परिणाम "uqda-e-jaa.n"
नज़्म
दो शम्ओं' की लौ पेचाँ जैसे इक शो'ला-ए-नौ बन जाने की
दो धारें जैसे मदिरा की भरती हुइ किसी पैमाने की
जाँ निसार अख़्तर
नज़्म
कैसे कैसे अक़्ल को दे कर दिलासे जान-ए-जाँ
रूह को तस्कीन दी है दिल को समझाया भी है
सय्यदा शान-ए-मेराज
नज़्म
जब भी महताब-ए-ज़र-अफ़्शाँ के हो चेहरे पे नक़ाब
जान हम रख के हथेली पर उलट देते हैं
नूर-ए-शमा नूर
नज़्म
ऐ मतवालो नाक़ों वालो! नगरी नगरी जाते हो
कहीं जो उस की जान का बैरी मिल जाए ये बात कहो
इब्न-ए-इंशा
नज़्म
ज़िया-ए-ख़ामोश के सुकूत-आश्ना तरन्नुम में घुल रहा है
कि उक़्दा-ए-गेसू-ए-शब-ए-तार खुल रहा है
कृष्ण मोहन
नज़्म
इस के दम से हम पे वाज़ेह उक़्दा-ए-मर्ग-ओ-हयात
इस के दम से हम पे रौशन है जहान-ए-काएनात
अता आबिदी
नज़्म
राज़ हूँ दीदा-ए-इदराक से पिन्हाँ हूँ मैं
लाख सर मारा मगर उक़्दा-ए-मा'नी न खुला