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नज़्म
तुझ को बख़्शी थी किरन अज़-राह-ए-दिल-सोज़ी मगर
तू समझता है कि ये जूद-ओ-सख़ा लुत्फ़-ओ-अतफ़
सलमान अंसारी
नज़्म
बे-कराँ इज्ज़ की जाँ-सोख़्ता वीरानी में
जिस में उगते नहीं दिल-सोज़ि-ए-इंसाँ के गुलाब
नून मीम राशिद
नज़्म
ये बंगाली हसीनाओं की जल्वा-गाह है हमदम
यहाँ पीर-ओ-जवाँ आ कर मता-ए-दिल लुटाते हैं
ओवेस अहमद दौराँ
नज़्म
अपनी दिल-सोज़ी से ज़र्रे को बनाया आफ़्ताब
तू ने उल्टा रू-ए-मुस्तक़बिल से माज़ी का नक़ाब
मयकश अकबराबादी
नज़्म
पुरानी आदतें हों या पुराने ख़्वाब हों दिल के
नहीं आसान होता है भुलाना उन को ऐ हमदम
डॉ भावना श्रीवास्तव
नज़्म
मोहब्बत ज़िंदाबाद अब तक शगुफ़्ता दिल हैं जिस ढब से
इसी ढब से रहें ना-वाक़िफ़-ए-फ़रियाद हम दोनों
अली मंज़ूर हैदराबादी
नज़्म
है मिज़ाज उस वक़्त कुछ बिगड़ा हुआ सय्याद का
ऐ असीरान-ए-क़फ़स मौक़ा नहीं फ़रियाद का
राज्य बहादुर सकसेना औज
नज़्म
क्यों न तड़पाए हमें अपने वतन की हालत
सोज़-ए-दिल रखते हैं हम दर्द-ए-जिगर रखते हैं
सरदार नौबहार सिंह साबिर टोहानी
नज़्म
आज भी तेरे लिए सोज़िश-ए-ग़म कम तो नहीं
ज़ख़्म-ए-दिल पर तिरे हमदम कोई मरहम तो नहीं
मसऊद हुसैन ख़ां
नज़्म
सभी अहल-ए-बसीरत अहल-ए-दिल मीनार अज़्मत के
मेरी सूरत तो क्या है नाम से वाक़िफ़ नहीं कोई
नसीर प्रवाज़
नज़्म
हुजूम-ए-दिल-बराँ आदाब-ए-गिर्या से नहीं वाक़िफ़
दर-ओ-दीवार-ए-हसरत में ज़रा सी भीड़ लग जाए तो चलते हैं
नजीब अहमद
नज़्म
मज़ाक़-ए-दिल-बरी है इश्क़ के पैग़ाम से वाक़िफ़
तसव्वुर है मिरा खोया हुआ सा तेरी आँखों में