aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "zaad-e-rah"
ज़ाद-ए-रहनेक आ'माल हैं
जिन पे लम्स बाक़ी हैज़ाद-ए-राह काफ़ी है
सनसनाती हुई ख़ामुशी ज़ाद-ए-राहग़म-ज़दा उधर मिरे हम-सफ़र
अलामत-ए-ज़िंदगी थी ख़्वाबों की कहकशाँज़ाद-ए-राह थीं हैरतें वफ़ाएँ
अभी तलक हैं फ़ज़ाएँ उसी से आलूदावो एक आग कभी ज़ाद-ए-राह थी! अपना
ज़ाद-ए-राह-ए-सफ़र तवक्कुल हैरहनुमाई को उस की गफ़्फ़ारी
चराग़ राह में उस के अमल से जलने लगेलो आज सुब्ह-ए-शब-ए-इंतिज़ार आ ही गई
ऐ मिरे सोच-नगर की रानी ऐ मिरे ख़ुल्द-ए-ख़याल की हूरइतने दिनों जो मैं घुलता रहा हूँ तेरे बिना यूँही दूर ही दूर
यूँ कहने को राहें मुल्क-ए-वफ़ा की उजाल गयाइक धुँद मिली जिस राह में पैक-ए-ख़याल गया
रुक के ख़ुशियों को इकट्ठा कर लेंज़ाद-ए-रह इन को बना लें अपना
अजीब ख़ू-ए-सफ़र थीजो ज़ाद-ए-राह थी
ज़ाद-ए-सफ़र हो
और क्या शजरजिन-ओ-परी-ज़ाद-ओ-बशर
ज़िंदगी मेरीमिरा ज़ाद-ए-सफ़र
न शरीक-ए-सफ़र-ओ-ज़ाद-ए-सफ़र माँगा हैन सदा-ए-जरस-ओ-बाँग-ए-दरा माँगी है
ये ज़ाद-ए-सफ़र साथ लिया हैरुख़्सत के रुख़्सारों पर
कितने हंगामे कितनी तहरीकेंकितने नारे जो थे ज़बाँ ज़द-ए-आम
तू है सज़ा मिरे होने कीया है मेरा ज़ाद-ए-सफ़र
सफ़र को ब-उजलत रवाना हुए इस तरह हमन ज़ाद-ए-सफ़र था
जितना ज़ाद-ए-सफ़र मेरे हम-राह थामैं ने सब रख दिया
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