aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "zarar"
मगर हुआ क्याज़रा तवक़्क़ुफ़ के बा'द बोले नहीं गया मैं
पंडित ओ मुल्ला ओ राहिब बे-ज़रर ठहरे मगरटूटने वाला है तुझ पर इक यहूदी का इताब
अज़ल से इसी ढब की पाबंद है शाम की ज़ाहिरा बे-ज़रर शोख़ नागिनउभरते हुए और लचकते हुए और मचलते हुए कहती जाती है आओ मुझे देखो मैं ने
मोहब्बत ज़िंदगी हैमोहब्बत दिल की तीरा साअ'तों में रौशनी है
रज़ा-ए-हक़ को नजात-ए-बशर कहा तू नेतअ'ईनात-ए-ख़ुदी को ज़रर कहा तू ने
किसी के फ़र्ज़ करने सेअगर फ़ितरत बदल सकती
क्यों ज़माने के ख़म-ओ-पेच में उलझा है तूदिल में एहसास-ए-तबाही-ओ-ज़रर पैदा कर
गिरा रहा है तिरा शौक़ शम्अ पर तुझ कोमुझे ये डर है न पहुँचे कहीं ज़रर तुझ को
गुनाहों में ज़रर होता, दुआओं में असर होतामोहब्बत की नज़र होता, हसीनों की अदा होता
उस का चेहराउस की आँखें
न उम्र-ए-ख़िज़्र न शोहरत न ख़्वाब की ता'बीर माँगूँगान दुश्मनों के ज़रर से न शर से दोस्तों के
एक अजीब ख़्वाहिश हैइस ज़मीं के कोने में
तुम्हें है फ़ख़्र कि तुम हो मिरी शरीक-ए-हयातमुझे ये दुख है
अपनी आँखें ज़रा मुझे देनामैं दिखाऊँ तिरी नज़र से तुझे
ये हमारी क़िस्मत केजितने भी सितारे हैं
जाने क्यूँ देख के बाज़ार को डर आने लगाबे-ज़रर चीज़ों से भी ख़ौफ़-ए-ज़रर आने लगा
हाँ ये मुमकिन है शुआएँ हों ज़रर का बाइ'सकौन कहता है उजालों से करो कस्ब-ए-ज़ियाँ
हुस्न मंज़र में कहाँ हैये हमारे मन की आँखों में कहीं है
अगर तुम फ़र्ज़ कर लोतुम मेरे कार-ए-नशात-ओ-वस्ल का यकता ज़रीया हो
लोग मस्जिद भी नहीं जातेमैं उस को मस्जिद-ए-ज़रार के बाहर मिलूँगा
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