aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "zarb-e-haram"
ज़र्ब-ए-कारीएक ला'नत है
बहरूपिए!इस विलायत में ज़र्ब-ए-मसल है
ज़र्ब-ए-कलीम कुंद है फ़िरऔन सुर्ख़-रू
कहीं ओढ़ ले अपना रूपएक ज़र्ब-ए-मुसलसल
मय-ख़ाना सलामत है तो हम सुर्ख़ी-ए-मय सेतज़ईन-ए-दर-ओ-बाम-ए-हरम करते रहेंगे
मै-कदा नूर कादिलबरान-ए-हरम
ऐसे इंसान कीजिस की बस एक ज़र्ब-ए-असा से
सनम-कदों में बढ़ा ए'तिबार-ए-अहल-ए-हरमहरम ने दैर-नशीनों का एहतिराम किया
मोहब्बत 'इश्क़ है ज़र्ब-ए-ख़ुदी हैमोहब्बत ज़ुल्फ़िक़ार-ए-हैदरी है
हिंदिसे हो गए ख़िरद के नक़ीबज़र्ब-ओ-तक़सीम से बनी तहज़ीब
काबे में बुत-कदे में है यकसाँ तिरी ज़ियामैं इमतियाज़-ए-दैर-ओ-हिरम में फँसा हुआ
ये क्या ज़र्ब-ए-पैहम सीहर दम है सीने पे मेरे
क़ुरआँ लिया हाथों में सनम हम ने उठायातब जा के सर-ए-दैर-ओ-हरम हम ने उठाया
छूट सकता नहीं तेशा मेराइस की हर ज़र्ब-ए-जवाँ से जब तक
ये खेल कैसा कि सारे झगड़ेये ज़र्ब-ओ-तक़सीम जम’-ओ-तफ़रीक़
हमारे फ़न की अलामात को समझ न सकेंचराग़-ए-दैर-ओ-हरम से किसी का घर न जले
हम अपने तेशों की ज़र्ब-ए-कारीसे उन के सीनों को छेद डालें
बे-मोजज़ा दुनिया में अभरतीं नहीं क़ौमेंजो ज़र्ब-ए-कलीमी नहीं रखता वो हुनर क्या!
गाहे सनम-तराश ब-नाम-ए-हरम उठेपर्दे निगाह के भी मगर बेश ओ कम उठे
पहले भी क्या सुनाई दिया होगाकि एक अभागी समाअ'त को एक घंटे की नशा गुमान ज़र्ब-ए-नादीदा
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