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नज़्म
क्यूँ ज़ियाँ-कार बनूँ सूद-फ़रामोश रहूँ
फ़िक्र-ए-फ़र्दा न करूँ महव-ए-ग़म-ए-दोश रहूँ
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
ढूँढिए चल के कहीं उम्र-ए-गुज़िश्ता का सुराग़
कश्ती-ए-दिल के लिए सैल-ए-ज़माँ कुछ भी नहीं
मसऊद हुसैन ख़ां
नज़्म
ढूँढिए चल के कहीं उम्र-ए-गुज़िश्ता का सुराग़
कश्ती-ए-दिल के लिए सैल-ए-ज़माँ कुछ भी नहीं
मसऊद हुसैन ख़ां
नज़्म
उठ जज़्बा-ए-ख़ुद्दारी ता-चंद ज़ियाँ-कारी
उठ जोश-ए-हमिय्यत उठ ये ख़्वाब-ए-गिराँ कब तक
बशीरून्निसा बेगम बशीर
नज़्म
नग़्मे का दौर, दौर-ए-मय-ओ-रक़्स का मज़ा
जिस को ज़बान कह न सके उस से भी सिवा