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नज़्म
किसी ने निकहत-ए-ज़ुल्फ़-परेशाँ का नहीं पूछा
किसी ने दुख के अंदर रौशनी की छब नहीं देखी
अब्बास ताबिश
नज़्म
शोरिश-ए-दर्द-ओ-ग़म-ए-ज़ुल्फ़-ए-परेशाँ की क़सम
चश्म-ए-नम चाक-जिगर दीदा-ए-हैराँ की क़सम
अयाज़ बिलग्रामी
नज़्म
मुब्तला पेच में हैं ज़ुल्फ़-ए-परेशाँ की तरह
दर पे लटके हैं बशर ख़ार-ए-मुग़ीलाँ की तरह
सय्यद मोहम्मद जाफ़री
नज़्म
वो तेरी मस्त आँखों का नवेद-ए-ज़िंदगी देना
वो अक्सर खेलना ज़ुल्फ़-ए-परेशाँ से हवाओं का
ज़िया फ़तेहाबादी
नज़्म
तुम्हारे होंटों से फूलों का रस टपकता था
तुम्हारी ज़ुल्फ़-ए-परेशाँ भी बा-सलीक़ा थी
सलाहुद्दीन नय्यर
नज़्म
ख़्वाहिश-ए-साया-ए-गेसू-ए-परेशाँ ही नहीं
जन्नत-ए-आरिज़-ओ-लब की भी तमन्ना न करूँ
इम्तियाज़ अहमद क़मर
नज़्म
वो ज़ुल्फ़-ए-ख़म-ब-ख़म शमीम-ए-मस्त से धुआँ धुआँ
वो रुख़ चमन चमन बहार-ए-जावेदाँ लिए हुए
फ़िराक़ गोरखपुरी
नज़्म
ब-सद ग़ुरूर ब-सद फ़ख़्र-ओ-नाज़-ए-आज़ादी
मचल के खुल गई ज़ुल्फ़-ए-दराज़-ए-आज़ादी
असरार-उल-हक़ मजाज़
नज़्म
ज़रा हमारे ये शाम-ओ-सहर सँवर जाएँ
तो हम भी ज़ुल्फ़-ओ-रुख़-ए-मह-वशाँ की बात करें