आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "salaatii.n"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "salaatii.n"
नअत
उस की ताज़ीम को उठते हैं सलातीन-ए-जहाँ
तिरे कूचे से जो मंसूब गदा हो जाए
पीर सय्यद नसीरुद्दीन नसीर गीलानी
ग़ज़ल
हैरत है कि इस दौर-ए-कुदूरत के सलातीं
हम अहल-ए-मोहब्बत को सज़ा क्यूँ नहीं देते
कुँवर महेंद्र सिंह बेदी सहर
शब्दकोश से सम्बंधित परिणाम
अन्य परिणाम "salaatii.n"
ग़ज़ल
तख़्त और चित्र सलातीं को मुबारक होवे
बस है कूचे में तिरे साया-ए-दीवार मुझे
बयाँ अहसनुल्लाह ख़ान
नज़्म
सौराज
है कल की अभी बात कि थे हिन्द के सरताज
देते थे तुम्हें आ के सलातीन-ए-ज़मन बाज
ज़फ़र अली ख़ाँ
ग़ज़ल
सलातीं को नहीं पाता मिज़ाज उन के फ़क़ीरों का
कि अन्क़ा-ए-फ़लक-परवाज़ है क़ाफ़-ए-क़नाअत का
बयान मेरठी
नज़्म
शिकवा
वादी-ए-नज्द में वो शोर-ए-सलासिल न रहा
क़ैस दीवाना-ए-नज़्ज़ारा-ए-महमिल न रहा
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
मुझ से पहले
फिर भी माज़ी का ख़याल आता है गाहे-गाहे
मुद्दतें दर्द की लौ कम तो नहीं कर सकतीं
अहमद फ़राज़
नज़्म
निसार मैं तेरी गलियों के
चमक उठे हैं सलासिल तो हम ने जाना है
कि अब सहर तिरे रुख़ पर बिखर गई होगी

