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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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स्मृति

पुण्य तिथि

सबसे गर्म मिज़ाज प्रगतिशील शायर जिन्हें शायर-ए-इंकि़लाब (क्रांति-कवि) कहा जाता है

क़दम इंसाँ का राह-ए-दहर में थर्रा ही जाता है

चले कितना ही कोई बच के ठोकर खा ही जाता है

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