aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
शब्दार्थ
बिसात-ए-इज्ज़ में था एक दिल यक क़तरा ख़ूँ वो भी
सो रहता है ब-अंदाज़-ए-चकीदन सर-निगूँ वो भी
"बिसात-ए-इज्ज़ में था एक दिल यक क़तरा ख़ूँ वो भी" ग़ज़ल से की मिर्ज़ा ग़ालिब