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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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आज की प्रस्तुति

रामपूर स्कूल के प्रमुख शायर/ महशर इनायती के शागिर्द

उजाला दश्त-ए-जुनूँ में बढ़ाना पड़ता है

कभी कभी हमें ख़ेमा जलाना पड़ता है

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