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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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आज की प्रस्तुति

सूफ़ी शायर धार्मिक शायरी के लिए विख्यात

अगर काबे का रुख़ भी जानिब-ए-मय-ख़ाना हो जाए

तो फिर सज्दा मिरी हर लग़्ज़िश-ए-मस्ताना हो जाए

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