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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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स्मृति

पुण्य तिथि

लखनऊ के मुम्ताज़ और नई राह बनाने वाले शायर/मिर्ज़ा ग़ालिब के समकालीन

सब हमारे लिए ज़ंजीर लिए फिरते हैं

हम सर-ए-ज़ुल्फ़-ए-गिरह-गीर लिए फिरते हैं

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