aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
शब्दार्थ
हैराँ हूँ दिल को रोऊँ कि पीटूँ जिगर को मैं
मक़्दूर हो तो साथ रखूँ नौहागर को मैं
Interpretation:
Rekhta AI
यहाँ दुख इतना गहरा है कि बोलने वाला तय नहीं कर पाता उसे कैसे निकाले—आँसुओं से या अपने भीतर की तड़प को “जिगर पीटकर” दिखाकर। “विलाप करने वाले” को साथ रखने की बात बढ़ा-चढ़ाकर कही गई है, यानी मातम अब लगातार चलने वाली अवस्था बन गया है। भाव का केंद्र है हैरानी, बेबसी और भीतर का तूफ़ान।
Interpretation:
Rekhta AI
यहाँ दुख इतना गहरा है कि बोलने वाला तय नहीं कर पाता उसे कैसे निकाले—आँसुओं से या अपने भीतर की तड़प को “जिगर पीटकर” दिखाकर। “विलाप करने वाले” को साथ रखने की बात बढ़ा-चढ़ाकर कही गई है, यानी मातम अब लगातार चलने वाली अवस्था बन गया है। भाव का केंद्र है हैरानी, बेबसी और भीतर का तूफ़ान।
"हैराँ हूँ दिल को रोऊँ कि पीटूँ जिगर को मैं" ग़ज़ल से की मिर्ज़ा ग़ालिब