आबिद हुसैन आबिद के शेर
हुज्जतें वस्ल की जब याद दिलाईं उन को
बोले वो शर्म का अंदाज़ था इंकार न था
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तुम ने लड़े बग़ैर ग़ुलामी क़ुबूल की
अच्छे भले वुजूद पे सर राएगाँ गया
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