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अबुल मुजाहिद ज़ाहिद

1928 - 2009 | रामपुर, भारत

इस्लामी चिन्तन के प्रभाव में शायरी करनेवाले प्रसिद्ध शायर

इस्लामी चिन्तन के प्रभाव में शायरी करनेवाले प्रसिद्ध शायर

ग़ज़ल 6

नज़्म 1

 

शेर 9

एक हो जाएँ तो बन सकते हैं ख़ुर्शीद-ए-मुबीं

वर्ना इन बिखरे हुए तारों से क्या काम बने

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तुम चलो इस के साथ या चलो

पाँव रुकते नहीं ज़माने के

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मिला घर से निकल कर भी चैन 'ज़ाहिद'

खुली फ़ज़ा में वही ज़हर था जो घर में था

पुस्तकें 10

दिल्ली

 

1960

Yad-e-Baiza

 

1998

Shumara Number-001

1980

Shumara Number-002

1980

Shumara Number-003

1980

Shumara Number-004

1980

Shumara Number-005

1980

Shumara Number-006

1980

Shumara Number-007

1980

Shumara Number-000

1981

 

चित्र शायरी 2

तुम चलो इस के साथ या न चलो पाँव रुकते नहीं ज़माने के

 

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