धावा बोलेगा बहुत जल्द ख़िज़ाँ का लश्कर
शाख़ को नेज़ा करूँ फूल को तलवार करूँ
व्यवसाय से सरकारी अधिकारी आलोक यादव तार्किक बुद्धि और भावुक हृदय रखते हैं जो उन्हें एक विशिष्ट शायर बनाता है। कल्पना की ऊँची उड़ान भरते हुए भी उनके पांव धरातल पर टिके रहते हैं। उनकी शायरी में जीवन की विडम्बनायें हैं तो प्रेम के विविध रंग भी हैं।