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Firaq Gorakhpuri's Photo'

फ़िराक़ गोरखपुरी

1896 - 1982 | इलाहाबाद, भारत

प्रमुख पूर्वाधुनिक शायरों में विख्यात, जिन्होंने आधुनिक उर्दू गज़ल के लिए राह बनाई/अपने गहरे आलोचनात्मक विचारों के लिए विख्यात/भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित

प्रमुख पूर्वाधुनिक शायरों में विख्यात, जिन्होंने आधुनिक उर्दू गज़ल के लिए राह बनाई/अपने गहरे आलोचनात्मक विचारों के लिए विख्यात/भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित

फ़िराक़ गोरखपुरी के स्कॉलर

फ़िराक़ गोरखपुरी और मीर तक़ी मीर की शेरी रिवायत की बाज़-याफ़्त (पुनरारंभ)

यह लेख फ़िराक़ गोरखपुरी की ग़ज़ल में हिंदुस्तानी लहजे की मौजूदगी और 'ख़ुदा-ए-सुख़न' मीर तक़ी मीर की क्लासिकी रिवायत को फिर से ज़िंदा करने पर रोशनी डालता है।

फ़िराक़ गोरखपुरी: इंसान-दोस्त और ज़िंदगी के दर्द का शायर

यह लेख फ़िराक़ की ज़िंदगी, उनकी इंसान दोस्ती, आज़ादी के आंदोलन में उनकी भूमिका और उनकी शायरी में मौजूद इंसानी ज़िंदगी के दुखों के बयान पर आधारित है।

'रूप': फ़िराक़ की रुबाइयों में हिंदुस्तानी औरत और घरेलू मोहब्बत की तस्वीर

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फ़िराक़ का भाषाई नज़रिया: उर्दू और खड़ी बोली का तहज़ीबी रिश्ता

इस लेख में ज़बान के बारे में फ़िराक़ गोरखपुरी के नज़रिए, उर्दू के खड़ी बोली से ताअल्लुक़ और बनावटी ज़बान के विरोध पर बात की गई है।

फ़िराक़ की इश्क़िया शायरी: रूमानियत और संस्कृत सौंदर्यशास्त्र का हसीन संगम

इस लेख में फ़िराक़ की शायरी पर अंग्रेज़ी रूमानियत और संस्कृत काव्य के असर और उनके यहाँ हुस्न-ओ-इश्क़ के आफ़ाक़ी (सार्वभौमिक) तसव्वुर का जायज़ा लिया गया है।

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