हकीम ग़ुलाम नबी
पुस्तकें 114
हिंदुस्तान की कीमियागरी
जिन में कीमिया की इब्तिदा और जो सूरतें उसने रफ्ता रफ्ता इख्तियार कीं, जो जो नाम उसे दिए गए। जो जो फ़स्ल और रिवायात उसके मुताल्लिक़ ईजाद किए गए। कीमिया-ए ब-हर क़दीम-ओ-जदीद के अनासिर वाले कान और फ़लात के नाम - तादाद-ओ-तक़सीम इन दोनों के उसूल-ओ-मसाइल का मुक़ाबला। अहल-ए मश्रिक़-ओ-अहल-ए मगरिब की कीमिया साज़ी के अक़वाल-ओ-मसाइल की तशरीह और मुक़ाबला। कीमियावी तज्रुबात - आलात जो कीमिया साज़ी ओ याज़मी और नशा जात जो निहायत मुरब्बा-उल-तासीर में और रिवायत ही कम मिकदार में इस्तेमाल होते हैं और जो कुश्ता और दक़ीक़ अमराज़ के इलाज में तीर-ब-हदफ़ हैं के बनाने में काम आते हैं। मुख्तलिफ़ अक़्साम के अर्क़-ओ-अद्विया बनाने की तरकीब - इल्म-ए कीमिया की ग़र्ज़ - सनाए और कीमिया का ताल्लुक़। मसअला ला-तज्रुबी - फ़लिज़ात का सितारों से ताल्लुक़। अलामात जो ख़तरांत की जगह इस्तेमाल की जाती थीं। माद्दी अश्या की दर्जा बंदी वग़ैरा वग़ैरा का मुफ़स्सल हाल दर्ज किया गया है।
1905