Font by Mehr Nastaliq Web

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

रद करें डाउनलोड शेर
Jameeluddin Aali's Photo'

जमीलुद्दीन आली

1925 - 2015 | कराची, पाकिस्तान

अपने दोहों के लिए मशहूर।

अपने दोहों के लिए मशहूर।

जमीलुद्दीन आली

ग़ज़ल 44

नज़्म 7

अशआर 14

तेरे ख़याल के दीवार-ओ-दर बनाते हैं

हम अपने घर में भी तेरा ही घर बनाते हैं

तुम ऐसे कौन ख़ुदा हो कि उम्र भर तुम से

उमीद भी रखूँ ना-उमीद भी रहूँ

कुछ छोटे छोटे दुख अपने कुछ दुख अपने अज़ीज़ों के

इन से ही जीवन बनता है सो जीवन बन जाएगा

जैसे साहिल से छुड़ा लेती हैं मौजें दामन

कितना सादा है तिरा मुझ से गुरेज़ाँ होना

बिखेरते रहो सहरा में बीज उल्फ़त के

कि बीज ही तो उभर कर शजर बनाते हैं

दोहा 21

हर इक बात में डाले है हिन्दू मुस्लिम की बात

ये ना जाने अल्हड़ गोरी प्रेम है ख़ुद इक ज़ात

  • शेयर कीजिए

उर्दू वाले हिन्दी वाले दोनों हँसी उड़ाएँ

हम दिल वाले अपनी भाषा किस किस को सिखलाएँ

  • शेयर कीजिए

'आली' अब के कठिन पड़ा दीवाली का त्यौहार

हम तो गए थे छैला बन कर भय्या कह गई नार

  • शेयर कीजिए

साजन हम से मिले भी लेकिन ऐसे मिले कि हाए

जैसे सूखे खेत से बादल बिन बरसे उड़ जाए

  • शेयर कीजिए

नींद को रोकना मुश्किल था पर जाग के काटी रात

सोते में जाते वो तो नीची होती बात

  • शेयर कीजिए

पुस्तकें 151

चित्र शायरी 4

 

वीडियो 25

This video is playing from YouTube

अन्य शायरों को पढ़िए

 

Recitation

बोलिए