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हसीन हस्सान नदवी

1907 - 1974 | दिल्ली, भारत

बच्चों के प्रसिद्ध साहित्यकार और पत्रिका ‘पयाम-ए-तालीम’ के संपादक

बच्चों के प्रसिद्ध साहित्यकार और पत्रिका ‘पयाम-ए-तालीम’ के संपादक

हसीन हस्सान नदवी का परिचय

मूल नाम : मोहम्मद हसीन हस्सान

जन्म :पीलीभीत, उत्तर प्रदेश

निधन : 13 Jul 1974 | दिल्ली, भारत

पहचान: बच्चों के प्रसिद्ध साहित्यकार और पत्रिका ‘पयाम-ए-तालीम’ के संपादक

मुहम्मद हसीन हस्सान नदवी जामिई, जो साहित्यिक जगत में हसीन हस्सान के नाम से प्रसिद्ध हैं, का जन्म 1907 ई. में पीलीभीत में हुआ। प्रारंभिक शिक्षा घर पर प्राप्त की जहाँ उन्होंने उर्दू और फ़ारसी पढ़ी। इसके बाद बरेली के मदरसे में अरबी की शिक्षा प्राप्त की और फिर दारुल उलूम नदवतुल उलेमा से अरबी की उच्च शिक्षा पूरी की। 1927 ई. में वे जामिया मिल्लिया इस्लामिया से जुड़े और वहाँ आधुनिक शिक्षा, विशेषकर अंग्रेज़ी, की पढ़ाई आरंभ की।

1930–31 के कांग्रेस आंदोलन में सक्रिय भागीदारी के कारण उनकी शिक्षा कुछ समय के लिए बाधित हो गई। इसी दौरान जब दिल्ली कांग्रेस ने उर्दू, अंग्रेज़ी और हिंदी में कांग्रेस बुलेटिन प्रकाशित करने की योजना बनाई, तो उन्होंने उर्दू बुलेटिन के प्रभारी शफ़ीक़ुर्रहमान क़िदवई के सहायक के रूप में कार्य किया। यह क्रम लगभग एक वर्ष तक चला, जिसके बाद उन्हें जेल भी जाना पड़ा।

रिहाई के बाद उनकी नियुक्ति मकतबा जामिया में लिटरेरी असिस्टेंट के रूप में हुई, जहाँ शीघ्र ही प्रसिद्ध बाल पत्रिका ‘पयाम-ए-तालीम’ उनके सुपुर्द कर दी गई। बाद में वे इसके संपादक नियुक्त हुए और अनेक वर्षों तक अत्यंत लगन, दृष्टि और साहित्यिक सूझबूझ के साथ इसका संपादन करते रहे। उनके दौर में पयाम-ए-तालीम उर्दू बाल साहित्य की एक मानक और प्रभावशाली पत्रिका बन गई।

हसीन हस्सान बच्चों के एक प्रतिष्ठित कहानीकार भी थे। उनकी प्रमुख कृतियों में ‘दुनिया के बच्चे’, छोटा चमू, नन्हा पप्पी, नामवरान-ए-इस्लाम, मीर तकी मीर, मीर अनीस (बच्चों के लिए), सर्कस, शरारत, बर्फ का घर, बहादुर सैयाह और ‘पयाम-ए-तालीम की कहानी’ शामिल हैं। अंतिम पुस्तक में उन्होंने पत्रिका पयाम-ए-तालीम की शुरुआत और विकास का इतिहास अत्यंत रोचक ढंग से प्रस्तुत किया है।

उनके संपादन काल में पयाम-ए-तालीम के कई विशेषांक प्रकाशित हुए, जिनमें 1938 का सालगिरह नंबर और 1946 का जुबली नंबर विशेष उल्लेखनीय हैं। उनकी साहित्यिक और संपादकीय सेवाओं के सम्मान में पयाम-ए-तालीम ने नवंबर 1974 का अंक “हसीन हस्सान नंबर” के रूप में प्रकाशित किया।

निधन: 13 जुलाई 1974 को उनका देहांत हुआ।

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