राज नारायण राज़ के शेर
अब लोग अपने आप को पहचानते नहीं
पेश-ए-निगाह जैसे कोई आईना न हो
गुल-दान में सजा के हैं हम लोग कितने ख़ुश
वो शाख़ एक फूल भी जिस पर नया न हो
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टैग : फूल
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