शाद सिद्दीक़ी के शेर
अदब इतना कि क़दमों में पड़े हैं
अना इतनी कि लंका ख़ाक कर दें
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किस ने की हैं ये बोतलें ख़ाली
पी गया कौन अपनी तन्हाई
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere