सिराजुद्दीन सिराज के शेर
हर मुसीबत से गुज़र जाता हूँ हँसता-खेलता
उन के दर से पेश आती ही नहीं मुश्किल मुझे
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere