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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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मुल्तान से संबंध रखने वाले प्रतिष्ठित शायर, विभिन्न साहित्यिक संस्थानों से जुड़े रहे

मुल्तान से संबंध रखने वाले प्रतिष्ठित शायर, विभिन्न साहित्यिक संस्थानों से जुड़े रहे

तारिक़ नईम

ग़ज़ल 21

अशआर 18

ज़मीन इतनी नहीं है कि पाँव रख पाएँ

दिल-ए-ख़राब की ज़िद है कि घर बनाया जाए

अजीब दर्द का रिश्ता था सब के सब रोए

शजर गिरा तो परिंदे तमाम शब रोए

अब आसमान भी कम पड़ रहे हैं उस के लिए

क़दम ज़मीन पर रक्खा था जिस ने डरते हुए

अभी फिर रहा हूँ मैं आप-अपनी तलाश में

अभी मुझ से मेरा मिज़ाज ही नहीं मिल रहा

ये ख़याल था कभी ख़्वाब में तुझे देखते

कभी ज़िंदगी की किताब में तुझे देखते

पुस्तकें 3

 

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