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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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A. Hameed's Photo'

लोकप्रिय कथाकार और नाटककार, रुमानी शैली के लेखन के लिए प्रसिद्ध.

लोकप्रिय कथाकार और नाटककार, रुमानी शैली के लेखन के लिए प्रसिद्ध.

ए. हमीद की कहानियाँ

मंज़िल मंज़िल

ये अफ़्साना अधूरी मोहब्बत, तक़दीर के फ़ैसलों और यादों के दवाम (हमेशगी/अमरीयत) की एक सहर-अंगेज़ (दिलकश/जादुई) रोमानवी दास्तान है। कहानी का ताना-बाना रावी (कहानी-कार) और 'राजदा' नामी लड़की के गिर्द घूमता है, जिनके दरमियान गुज़रा हुआ वक़्त मोहब्बत के उरूज (बुलंदी) और गहरे जज़्बाती लगाव की अक्कासी (चित्रण) करता है। ताहम (फिर भी), राजदा की ज़िन्दगी में उसके चचेरे भाई की अचानक आमद और फिर बेबसी के आलम में उससे शादी, दोनों के दरमियान मुस्तक़िल जुदाई का सबब बन जाती है। बरसों बाद एक घरेलू ख़ातून (महिला) के रूप में राजदा से दोबारा मिलने के बावजूद, रावी माद्दी (भौतिक/सांसारिक) दुनिया की दूरियों से मावरा (परे/दूर) होकर अपने तख़य्युल (कल्पना) और रूह में बसी 'अपनी राजदा' की ग़ैर-फ़ानी (कभी ख़त्म ना होने वाली) यादों में जीने का हौसला और तख़्लीक़ी तवानाई (रचनात्मक ऊर्जा) तलाश कर लेता है।

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