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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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अब्दुल अहद साज़

1950 - 2020 | मुंबई, भारत

मुम्बई के प्रख्यात आधुनिक शायर, संजीदा शायरी पसंद करने वालों में लोकप्रिय।

मुम्बई के प्रख्यात आधुनिक शायर, संजीदा शायरी पसंद करने वालों में लोकप्रिय।

अब्दुल अहद साज़

ग़ज़ल 55

नज़्म 28

अशआर 44

बुरा हो आईने तिरा मैं कौन हूँ खुल सका

मुझी को पेश कर दिया गया मिरी मिसाल में

दोस्त अहबाब से लेने सहारे जाना

दिल जो घबराए समुंदर के किनारे जाना

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बचपन में हम ही थे या था और कोई

वहशत सी होने लगती है यादों से

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दाद-ओ-तहसीन की बोली नहीं तफ़्हीम का नक़्द

शर्त कुछ तो मिरे बिकने की मुनासिब ठहरे

ख़याल क्या है जो अल्फ़ाज़ तक पहुँचे 'साज़'

जब आँख से ही टपका तो फिर लहू क्या है

पुस्तकें 8

 

चित्र शायरी 1

 

वीडियो 16

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ऑडियो 16

ख़राब-ए-दर्द हुए ग़म-परस्तियों में रहे

खुली जब आँख तो देखा कि दुनिया सर पे रक्खी है

खिले हैं फूल की सूरत तिरे विसाल के दिन

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