ऐश देहलवी
ग़ज़ल 16
अशआर 6
बे-सबाती चमन-ए-दहर की है जिन पे खुली
हवस-ए-रंग न वो ख़्वाहिश-ए-बू करते हैं
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क़ितआ 1
ऑडियो 7
आशिक़ों को ऐ फ़लक देवेगा तू आज़ार क्या
क्या हुए आशिक़ उस शकर-लब के
जुरअत ऐ दिल मय ओ मीना है वो ख़ुद-काम भी है
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