अनवर शादानी के शेर
तिरे इस फूल से चेहरे ने अब के
मिरे ज़ख़्मों को महकाया बहुत है
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मेरी निगाह-ए-शौक़ का जादू भी कम नहीं
आँखों में आँखें डाल के देखा न कीजिए
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