दत्तात्रिया कैफ़ी के लेख
तश्बीह
अदबियात (साहित्य) का मूल 'अदब' है। अदब अरबी का एक शब्द है जिसके अर्थ हैं हर चीज़ की सीमा और अंदाज़े का ध्यान रखना। भाषा और रचना विज्ञान के विद्वान अदब या आदाब के अंतर्गत इन विद्याओं (इल्मों) को शामिल करते हैं: (1) इल्म-ए-लुग़त, (2) इल्म-ए-सर्फ़, (3)
मबादियात-ए-फ़साहत
हर ज़माने में कुछ लोग इस ख़याल के होते हैं कि क़ायदा और क़ानून फ़ुज़ूल हैं। उनके विचार में अभ्यास और आदत सब कुछ सिखा देती है। जन्मजात प्रतिभा का यह जुनून दिमाग़ों पर आज-कल हद से ज़्यादा हावी है। लेकिन देखा जाता है कि जो लोग साहित्य के मामले में कट्टर
उर्दू लिसानियात
भाषा असल में इंसान की बनाई हुई संस्थाओं या रचनाओं में से एक है। यह उनका साधन है जिनका काम इससे निकलता है। वही इसके रक्षक और मालिक हैं। उन्होंने हालात और ज़रूरतों के मुताबिक़ इसे अपने ढंग का बनाया है। हमेशा हर जगह ऐसा ही होता है। भाषा का हर अंग लगातार