जलील मानिकपूरी
ग़ज़ल 86
अशआर 347
मोहब्बत रंग दे जाती है जब दिल दिल से मिलता है
मगर मुश्किल तो ये है दिल बड़ी मुश्किल से मिलता है
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कहाँ हम और कहाँ अब शराब-ख़ाना-ए-इश्क़
उस का जल्वा जो कोई देखने वाला होता
ज़ालिम बुतों से आँख लगाई न जाएगी
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