ख़दीजा मस्तूर के उद्धरण
मुझे अम्न से मुहब्बत है, मुझे जंग से नफ़रत है, मगर मुझे उस जंग से भी अम्न की तरह मुहब्बत है जो इन्सान अपनी आज़ादी, अपनी इज़्ज़त और मुल्क की बक़ा के लिए लड़ता है।
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