मातम फ़ज़ल मोहम्मद
ग़ज़ल 9
अशआर 24
जहाँ से हूँ यहाँ आया वहाँ जाऊँगा आख़िर को
मिरा ये हाल है यारो न मुस्तक़बिल न माज़ी हूँ
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