मंज़ूर हाशमी
ग़ज़ल 21
अशआर 29
यक़ीन हो तो कोई रास्ता निकलता है
हवा की ओट भी ले कर चराग़ जलता है
-
शेयर कीजिए
- ग़ज़ल देखिए
क़ुबूल कैसे करूँ उन का फ़ैसला कि ये लोग
मिरे ख़िलाफ़ ही मेरा बयान माँगते हैं
-
शेयर कीजिए
- ग़ज़ल देखिए
सुना है सच्ची हो नीयत तो राह खुलती है
चलो सफ़र न करें कम से कम इरादा करें
-
शेयर कीजिए
- ग़ज़ल देखिए
इक ज़माना है हवाओं की तरफ़
मैं चराग़ों की तरफ़ हो जाऊँ
-
शेयर कीजिए
- ग़ज़ल देखिए
पुस्तकें 10
वीडियो 3
This video is playing from YouTube
अन्य शायरों को पढ़िए
-
मयकश अकबराबादी
-
वेद प्रकाश मालिक सरशार
-
अमीता परसुराम मीता
-
पीरज़ादा क़ासिम
-
ज़फ़र सिद्दीक़ी
-
किश्वर नाहीद
-
असद रिज़वी
-
करामत अली करामत
-
रियाज़त अली शाइक
-
जावेद मंज़र
-
अंजुम फ़ौक़ी बदायूनी
-
उबैदुल्लाह अलीम
-
अहमद फ़राज़
-
अलक़मा शिबली
-
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
-
क़तील शिफ़ाई
-
ज़फ़र इक़बाल
-
अमीर मीनाई
-
सय्यद यूसुफ़ अली खाँ नाज़िम
-
इफ़्तिख़ार आरिफ़