मासूम शर्क़ी के शेर
'मासूम' अजब है हाल-ए-चमन हर शोले का यहाँ बदला है चलन
शाख़ों को जलाया जाता है ताइर को सताया जाता है
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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere